माजुली टूरिस्ट पैलेस और नदी द्वीप के जानकारि
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| फोटो :travelescape-google |
माजुली एक नदी द्वीप है और टूरिस्ट पैलेस के तोर मे मने जाते है।
माजुली विक्ष के सवसे वडे नदी द्वीप है। नदी के मध्य मै लगा हुआ
यह द्वीप वहुत रोमांचक दैखते है। माजुली ब्रह्मपुत्र मै स्थित नदी द्वीप है।
यह द्वीप सर्वक्षन के द्बारा अनुमान किया है 15 से 20 साल तक विद्यमान है। माजुली नदी द्वीप लग भग करीब 100 से 150 साल आगे
इसके क्षेत्र फल था करिव 1250 वगृ किलुमिटार मै फैला था।
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| फोटो -Google |
अभि करबि लग भग क्षेत्र फल 450 वगृ किलुमिटार रहे गया है। माजुली नदी द्वीप हर वार आकार वदलता रहेता है। कयंकि वर्षा ऋतु के दौरान बार होने के कारन नदी द्वीप के आकार वदलता रहेता है। माजुली नदी द्वीप
पुरा तरफ से पानी से घेरा हुआ है। माजुली मै पहचने के लिए फेरि कि यातायत जरुरत होती है। माजुली नदी द्वीप मै फेरि यातायात के दोरान
वाहार के लग आ सकती है। और कोई दूसरा सविधाए उपलवध
नही है। और फेरि हि है एक मात्र उपाय। और यहा सै करिव जोरहाट
सेहेर है। और निमाती गन्दे मै दिन मै पाच वार एकही फेरी आती है।
यहा पे फेरि मोसम के अनुसार लग भग करिव 60-90 मिनटो मै माजुली लै आते है। और फिर आपस आती है। पानी मे उतार चराव होती रहति है।
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| फोटो :Google |
माजुली नदी द्वीप मै समान फेरि के द्वारान आती है। खाने के चिज चाहै अन्य किसि वस्तू। जैसै करिव नदी के इस पार से उस के मटरसाइकेल फेरि के द्वारा आते जाते है। इहा पे जो पर्यटक आती है
उसी को फेरि के द्वारान ले आती है। यहा पै चलतै लोगो कै परिशानि के
सामना करना परता है। माजुली द्वीप मै जो वसा हूआ है उन लोगो को
चारो तरफ से बारिश और पानी के निभर करते है। माजुली मे वसा हुआ
लोगो के पास ईहा बहा जाने के लिए सबका पास नाव है और जरूरि कालिन इसते माल करते है। इस द्वीप मै सवको तेरना आती है। यहा पे
सब कोई खुद खेती करते है और इहा सबजि उगाइ जाती है।
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माजुली मे अनेक जनजाति रहते है। इहा से एक है मिसिंग समुदाय ।इस जाति की महिलाए मेखला चादर ओर मेखला बुनती है। माजुली नदी द्वीप मै मठ ओर आक्षम के जाने जाते है। और 15वी शतादवी क्षिरि मत शकरदेव स्थापित किय गए। माजुली नदी द्वीप बसे हुए सत्र के बारे मे ही जादा सुने को मिलेगा। माजुली मै स्थापित सत्र के प्रमुख देवता क्षी कृष्णा
भगवान है। इस प्रतेक सत्र मे प्रमुख गुरु और कुछ उपगुरु है। आउनी आटी सत्र माजुली का सवसे वडा सत्र है। इस सत्र मै चपल पेहन कर अंदर जाना माना है। कयोंकि एसा करना सत्र का अपमान करना है ।इहा पे पुण चंद्रमा के दिन रसलीला आयोजन करते है 3 दिनो तक चलता है।
माजुली नदी द्वीप प्रदुषण मुकत है। इहा पे विभिन्न प्रकार के पक्षिया देखि जाति है। और तितलि देखने को मिलतघ है। पर्यटको के लिए वहुत सारे
चिज देखने को मिलेगे।






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